Hue Mar Ke Ham Jo Rusva : By Narendra Kohli Hindi Book | हुए मर के हम जो रुसवा : नरेंद्र कोहली द्वारा हिंदी पुस्तक
हुए मर के हम जो रुसवा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश :
नरेन्द्र कोहली भी खूब हैं, जो भी रचते हैं, उसका अंदाज ही निराला होता है, चाहे वह व्यंग्य रचनाएं ही क्यों न हों, कटाक्ष से भरी अब इसी ग़ालिब के शेर में देखिए, कितनी खूबसूरती से अपने ऊपर ही कह डाला। कैसी कसक छिपी है, कैसी तड़प जागी है! नरेन्द्र कोहली की 18 व्यंग्य रचनाएं प्रस्तुत हैं, आपकी भूख को शांत करने के लिए ‘डंडा किसका है’ एक रचना है, पर सभी में डंडा तो कोहली जी के हाथ में ही है चुलबुली भाषा और अनूठे अंदाज़ में उनकी लेखनी वास्तव में यह तय कर देती है कि वह कितने भी गंभीर क्यों न हो जाएं, पर उनके भीतर एक छिद्रान्वेषी छिपा है, जो समय-समय पर व्यंग्य का सरोपा भेंट करता रहता है।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | हुए मर के हम जो रुसवा | Hue Mar Ke Ham Jo Rusva |
| Author | Narendra kohli |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 164 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“सतत प्रयास न कि शक्ति और बुद्धिमत्ता- हमारी संभाव्यता को प्रकट करने की कुंजी है।” विंसटन चर्चिल
“Continuous effort – not strength or intelligence – is the key to unlocking our potential.” Winston Churchill
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