जीवन का रंगमञ्च : अमरीश पुरी | Jivan Ka Rangmanch : By Amrish Puri Hindi Book
जीवन का रंगमञ्च पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : अमरीश पुरी हिन्दी नाटक और फिल्म जगत के एक ताजा अभिनेता थे उनका ट्रेडमार्क हैट चौड़े कंधे, ऊँचा कद, गहरी नजर, रोबदार आवाज और सबसे बड़ कर सभी उपस्थितियों पर छा जाने वाली उपस्थिति भारतीय सिनेमा के इस अभूतपूर्व किरदार का सम्मोहन लंबे समय तक हमें आलोड़ित करता रहेगा। मोगांची खुश हुआ और डांग कभी रांग नहीं होता ये संवाद फिल्म दर्शकों के बीच अमर हो गए हैं, क्योंकि अमरीश पुरी अपने संवादों में अपनी दुर्धर्य आत्मा फूँक देते थे। खलनायक बहुत हुए हैं, परंतु खलनायकी को कला की ऊँचाई तक पहुंचाने वाला कलाकार एक ही हुआ
अमरीश पुरी अमरीश पुरी पंजाब के उन रनों में हैं जिन्होंने अदम्य जिजीविषा और कठिन संघर्ष से अपने को सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाया। 1950 के शुरू के दशकों में जब वे हीरो बनने की लालसा लिये मुंबई पहुँचे तब वहाँ उनका स्वागत करने वाला कोई नहीं था बहुत सारे असफल प्रयत्नों के बाद उन्होंने विपेटर की दुनिया में प्रवेश किया और उस दौर के महान निर्देशकों अब्राहम अलकाजी, सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड, बादल सरकार तथा नाटककारों विजय तेंडुलकर और मोहन राकेश के साथ काम करते हुए बहुत-सी चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं का उत्कृष्ट अभिनय कर एक नए रंग अनुभव के प्रणेता बने।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | जीवन का रंगमञ्च | Jivan Ka Rangmanch |
| Author | अमरीश पुरी / Amrish Puri, Anandmurti Guruman |
| Category | Biography Book in Hindi Fiction Book in Hindi PDF Jeevani Book in Hindi PDF Jivan Charitra Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 390 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“क्रोध मूर्खों के ही दामन में बसता है।” अल्बर्ट आइंस्टीन
“Anger dwells only in the bosom of fools.” Albert Einstein
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