सलाम आखिरी : मधु कांकरिया | Salam Akhiri : By Madhu Kankariya Hindi Book
सलाम आखिरी पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज, हर युग में अपने-अपने ढंग से जूमता रहा है। वैश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की जरूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की किलेबंदी का बाई प्रोडक्ट कहा और कभी सभ्य, सफेदपोश दुनिया का गटर जो ‘उनकी’ काम कल्पनाओं और कुंठाओं के कीचड़ को दूर अँधेरे में ले जाकर डंप कर देता है और, इधर बेश्याओं को एक सामान्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने की कवायद भी शुरू हुई है। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि समाज अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ वेश्यावृत्ति के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध हो खड़ा हो जाए; तमाम तरह के उत्पीड़न-दमन और शोषण का शिकार वेश्याएँ उन्मूलन के नाम पर जरूर होती रही हैं।
यह उपन्यास वेश्याओं और वेश्यावृत्ति के पूरे परिदृश्य को देखते हुए हमारे भीतर उन असहाय स्त्रियों के प्रति करुणा का उदेक करने की कोशिश करता है, जो किसी भी कारण इस बदनाम और नारकीय व्यवसाय में आ फँसी हैं। कलकत्ता के सोनागाछी रेड लाइट एरिया की अंधेरी गलियों का सीधा साक्षात्कार कराते हुए लेखिका सभ्य समाज की संवेदनहीनता और कठोरता को भी साथ-साथ झिंझोड़ती चलती है, और यही चीज इस उपन्यास को सिर्फ एक कथा-पुस्तक की हद से निकालकर एक जरूरी किताब में बदल देती है।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | सलाम आखिरी | Salam Akhiri |
| Author | Madhu Kankariya |
| Category | Novel Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 200 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“समय सबसे कम पाया जाने वाला संसाधन है, और जब तक इसका अच्छा प्रबंधन नहीं किया जाता है, तो बाकी किसी चीज का प्रबंधन नहीं किया जा सकता है।” ‐ पीटर एफ.ड्रकर
“Time is the scarcest resource, and unless it is managed well, nothing else can be managed.” ‐ Peter F. Drucker
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