समय के साथ-साथ : यशपाल वैद द्वारा हिंदी पुस्तक | Samaya Ke Sath Sath : By Yashpal Vaid Hindi Book
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पुस्तक के कुछ अंश : यशपाल वैद तीन दशक से अधिक समय से कहानी-लेखन में सृजनरत हैं और कहानीकार के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। सहजता और विडम्बना के कहानीकार के रूप में उन्हें सम्मान मिला है और उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली में परिवार, समाज, शिक्षा जगत और साहित्य जगत की विसंगतियों पर अपनी कहानियों के माध्यम से प्रहार किया है। समीक्षकों को उनकी कई कहानियों में लघु औपन्यासिक कृति की संभावनाएँ दिखाई देती रही है।
समय के साथ-साथ उनकी प्रथम औपन्यासिक कृति है। पूरी उम्मीद है इस उपन्यास का स्वागत होगा।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | समय के साथ-साथ | Samaya Ke Sath Sath |
| Author | Yashpal Vaid |
| Category | Essay On Books In Hindi | निबन्ध |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 136 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“वास्तविकता सपने को नष्ट कर सकती है; तो क्यों न सपना वास्तविकता को नष्ट करे?” ‐ जॉर्ज मूर
“Reality can destroy the dream; why shouldn’t the dream destroy reality?” ‐ George Moore
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