क्यों हुआ ऐसा मेरे साथ : राज भटनागर | Kyu Hua Aisa Mere Sath : By Raj Bhatnagar Hindi Book
क्यों हुआ ऐसा मेरे साथ पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : बहुत दिनों से अखबार में देख रही थी, “भारतीय ज्ञानपीठ’ द्वारा प्रकाशित कहानी, उपन्यास, आख्यान इत्यादि से मेरे मन में भी लालच पैदा हुआ काश कि मेरा भी कहानी संग्रह इतने महत्वपूर्ण, गौरवपूर्ण प्रकाशन से निकल पाता, सो मैं अपने आप को रोक न सकी और हिम्मत करके एक पत्र प्रकाशन के नाम डाल दिया, पर उसका कोई जवाब ही नहीं आया। फिर मैंने गोयनका जी से पूछा कि वहां तक कैसे पहुंचा जाए, उन्होंने रास्ता सुझाया कि मान्य संपादक जी श्री रविन्द्र कालिया से सम्पर्क करूं। मैंने फोन पर उनसे सम्पर्क किया, बाद में एक पत्र भी भेजा। तीन हफ्ते बाद उनका जवाब आया कि आप अपनी कहानियां भेज सकती हैं, सो मैंने तैयारी शुरू कर दी, टाइप कराई….. कहानी….. यह ‘कहानी’ है क्या…. बार-बार मन में विचार उमड़ता घुमड़ता रहा कि कहानी यानी जो बात कही गई हो, कहने को अनेकों बातें होती हैं, पर सब तो कहानी की श्रेणी में नहीं आतीं, जो साहित्य की एक अत्यन्त मूल्यवान विधा है। कही हुई बात वह जिससे बार-बार मन में जिज्ञासा जागे, जैसे पहले नानी, दादी की कहानियों को सुनकर बच्चों के मन में जागा करती थी, फिर क्या हुआ दादी?’ ऐसा क्यों हुआ नानी ?
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | क्यों हुआ ऐसा मेरे साथ | Kyu Hua Aisa Mere Sath |
| Author | राज भटनागर / Raj Bhatnagar |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Fiction Book in Hindi PDF Kahani Kahaniyan Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF Philosophy Book in Hindi Self Help Book in Hindi Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 104 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“संभावनाओं की सीमाओं का पता लगाने का एकमात्र रास्ता है कि उनसे आगे बढ़कर असंभव तक पहुंचा जाए।” ‐ आर्थर सी. क्लार्क
“The only way of finding the limits of the possible is by going beyond them into the impossible.” ‐ Arthur C. Clarke
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