संस्कृति से निकलती राहें : रामनरेश कुशवाह | Sanskrti Se Nikalati Rahen : By Ramnaresh Kushwaha Hindi Book
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संस्कृति से निकलती राहें पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : हमारा देश अनेक धर्मों एवं जातियों में विभक्त है और सैकड़ों पंथ अपने-अपने दृष्टिकोण से समाज को सुदृढ़ बनाने में प्रयासरत हैं। पर आज भी हमारा समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है और आएदिन मनुष्य लालचवश तंत्र-मंत्र एवं तांत्रिकों के चक्कर में फँसकर धन हानि क्या, प्राण-हानि तक कर डालता है। बाह्य सुख-सुविधाएँ अधिक-से- अधिक प्राप्त करने की जैसे होड़ लगी हुई है। इन सबके बीच व्यक्ति अपने आपको, अपनी अंतश्चेतना को बिलकुल भुला बैठा है। वह एक यांत्रिक प्राणी बनकर केवल भौतिक साधनों की अंधी दौड़ में दौड़ लगा रहा है |
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | संस्कृति से निकलती राहें | Sanskrti Se Nikalati Rahen |
| Author | रामनरेश कुशवाह / Ramnaresh Kushwaha |
| Category | हिन्दू / Hinduism Hindi Books Bhartiya Sanskriti In Hindi Books Social PDF Books In Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 128 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“स्वास्थ्य वह आत्म तत्व है जो जीवन के आनन्द को जीवंत बनाता है, इसके बिना जीवन धूमिल और स्वादहीन हो जाता है।” विलियम टैम्पल
“Health is the soul that animates all the enjoyments of life, which fade and are tasteless without it.” William Temple
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