संस्कृति से निकलती राहें : रामनरेश कुशवाह | Sanskrti Se Nikalati Rahen : By Ramnaresh Kushwaha Hindi Book

संस्कृति से निकलती राहें : रामनरेश कुशवाह | Sanskrti Se Nikalati Rahen : By Ramnaresh Kushwaha Hindi Book
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संस्कृति से निकलती राहें पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : हमारा देश अनेक धर्मों एवं जातियों में विभक्त है और सैकड़ों पंथ अपने-अपने दृष्टिकोण से समाज को सुदृढ़ बनाने में प्रयासरत हैं। पर आज भी हमारा समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है और आएदिन मनुष्य लालचवश तंत्र-मंत्र एवं तांत्रिकों के चक्कर में फँसकर धन हानि क्या, प्राण-हानि तक कर डालता है। बाह्य सुख-सुविधाएँ अधिक-से- अधिक प्राप्त करने की जैसे होड़ लगी हुई है। इन सबके बीच व्यक्ति अपने आपको, अपनी अंतश्चेतना को बिलकुल भुला बैठा है। वह एक यांत्रिक प्राणी बनकर केवल भौतिक साधनों की अंधी दौड़ में दौड़ लगा रहा है |

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name संस्कृति से निकलती राहें | Sanskrti Se Nikalati Rahen
Author
Categoryहिन्दू / Hinduism Hindi Books Bhartiya Sanskriti In Hindi Books Social PDF Books In Hindi
Language
Pages 128
Quality Good
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“सितारों की तरह होते हैं आदर्श; उन्हें आप हाथों से छू नहीं पाएंगे। लेकिन, समुद्र के नाविकों की तरह, आप उन्हें अपना मार्गदर्शक चुनते हैं, और उनका पीछा करते हुए आप अपनी मंजिल पा लेंगें।” ‐ कार्ल शुर्ट्ज़ (१८२९-१९०६), लेखक एवं राजनीतिज्ञ
“Ideas are like stars; you will not succeed in touching them with your hands. But, like the seafaring man on the desert of waters, you choose them as your guides, and following them you will reach your destiny.” ‐ Carl Shurtz, (1829-1906), Writer and Politician

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