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सुबह दोपहर शाम / Subah Dopahar Sham

सुबह दोपहर शाम : कमलेश्वर द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास | Subah Dopahar Sham : by Kamaleshwar Hindi PDF Book - Novel (Upanyas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सुबह दोपहर शाम / Subah Dopahar Sham
Author
Category, , , ,
Language
Pages 178
Quality Good
Size 4 MB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : यही तो बड़ी बात थी-बड़ी दादी में। उनकी दुनिया बहुत बड़ी थी। एक बार बरसात की रात थी-धरमार पानी बरस रहा था। मुडेरों और छतों की मिट्टी कट-कट कर परनालों से गिर रहा था। चारों तरफ घोर अंधियारा था। आठ कमरों के घर में घर में जगह-जगह तेल-बाती की कुप्पिया जल रही थी। बाहर का बड़ा दरवाजा खुला पड़ा था। कुंदन कुप्पी लेकर दरवाजा बंद करने गया……..

Pustak Ka Vivaran : Yahi to Badi bat thee-Badi Dadi mein. Unaki Duniya bahut badi thee. Ek bar Barsat kee rat thee-Dharamar Pani baras raha tha. Muderon aur chhaton kee mitti kat-kat kar paranalon se gir raha tha. Charon Taraph ghor Andhiyara tha. Aath Kamaron ke ghar mein ghar mein jagah-jagah tel-bati kee Kuppiya jal rahi thee. Bahar ka bada daravaja khula pada tha. Kundan kuppi lekar daravaja band karane gaya…….

Description about eBook : This was the big deal with my grandmother. His world was very big. Once it was a rainy night – Dharmar was raining water. The mud of the muders and roofs was being cut from the grooves. There was severe darkness everywhere. In the house of eight rooms, oil and wick was burning in the house. The big outside door was open. Kundan went to close the door with a flask …….

“खुशी अपने आप नहीं मिलती। यह आपके अपने कर्मों से ही आती है।” दलाई लामा
“Happiness is not something ready made. It comes from your own actions.” Dalai Lama

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