तपते हुए दिनों के बीच : सुभाष रस्तोगी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Tapate Huye Dinon Ke Beech : by Subhash Rastogi Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)

Book Nameतपते हुए दिनों के बीच / Tapate Huye Dinon Ke Beech
Author
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Pages 98
Quality Good
Size 770 KB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : जीवन बहुत विस्तृत है, विराट है । उसके विचित्र रूप हैं। कवि जीवन के इन रूपो को पकड़ने के लिए कविता का व्यवहार करता है। उसका ज्ञान, उसकी आकांक्षा, उसकी निर्जनता, उसका व्यक्तित्व, सामाजिक मनुष्य के साथ मिलने की उसकी आकुलता, इन सभी को वह अपनी कविता का चरित्र देकर छूने और पकड़ने की कोशिश करता है…….

Pustak Ka Vivaran : Jeevan bahut vistrt hai, virat hai . Usake vichitra roop hain. Kavi jeevan ke in rupo ko pakadane ke liye kavita ka vyavahar karata hai. Usaka gyan, usaki Aakaanksha, usaki Nirjanata, usaka vyaktitv, samajik manushy ke sath milane ki usaki aakulata, in sabhi ko vah apani kavita ka charitra dekar chhoone aur pakadane ki koshish karata hai………

Description about eBook : Life is very wide, vast. He has bizarre forms. The poet treats poetry to capture these forms of life. His knowledge, his aspirations, his desolation, his personality, his inability to meet with a social man, all these he tries to touch and hold by giving the character of his poetry ………

“यदि आप यह मानते हैं कि आप कर सकते हैं, तो संभवतः आप कर सकते हैं। यदि यह सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते, तो आप सुनिश्चित रुप से नहीं कर सकते। विश्वास वह स्विच है जो आपको आगे बढ़ाता है।” ‐ डेनिस वेटले
“If you believe you can, you probably can. If you believe you won’t, you most assuredly won’t. Belief is the ignition switch that gets you off the launching pad.” ‐ Denis Waitley

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