वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam
वेदान्त दर्शन के आयाम पुस्तक के कुछ अंश : पूरे भारतीय नवजागरण काल में ‘नव-वेदान्त’ कहे जाने वाले दार्शनिक चिन्तन की प्रधानता आद्यन्त रूप से देखी जा सकती है। उस समय के दार्शनिक जो एक साथ जन नायक और समाज सुधारक भी रहे, उन्होंने मानवीय जीवन के सभी पक्षों की व्याख्या पाश्चात्य सभ्यता बोध को पूर्वपक्ष बनाते हुए ‘नव-वेदान्तवादी’ दृष्टि से किया है। जीवन और जगत् के प्रति मायावादी दृष्टिकोण का नकार और जगत् की यथातथ्यता की स्वीकृति तथा वेदान्ती विश्वदृष्टि में ही प्रगतिशील एवं रचनात्मक जीवन के लिए अधिकाधिक अवकाश निर्मित करना नव-वेदान्ती चिन्तन की प्रस्थानमूलक विशिष्टता रही है। साथ ही साथ नव-वेदान्ती चिन्तन में उन सामाजिक-सांस्कृतिक विकारों के प्रति भी एक सशक्त आत्मचेतना दिखाई पड़ती है जिन्हें वेदान्त………..
Aapke liye aur spiritual PDFs tayaar hain—link par jayein
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam |
| Author | Ambika Dutt Sharma |
| Category | Social PDF Books In Hindi Spiritual PDF Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 641 |
| Quality | Good |
| Size | 143 MB |
| Download Status | Available |
“हमारा लेखन ऐसा नहीं होना चाहिए कि पाठक हमें समझ पाए, बल्कि ऐसा होना चाहिए कि वह किसी भी तरह हमें गलत न समझ जाए।” ‐ क्विन्टिलीयन, वक्ता
“We should not write so that it is possible for the reader to understand us, but so that it is impossible for him to misunderstand us.” ‐ Quintilian, rhetorician
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें












