वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam

वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam
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वेदान्त दर्शन के आयाम पुस्तक के कुछ अंश : पूरे भारतीय नवजागरण काल में ‘नव-वेदान्त’ कहे जाने वाले दार्शनिक चिन्तन की प्रधानता आद्यन्त रूप से देखी जा सकती है। उस समय के दार्शनिक जो एक साथ जन नायक और समाज सुधारक भी रहे, उन्होंने मानवीय जीवन के सभी पक्षों की व्याख्या पाश्चात्य सभ्यता बोध को पूर्वपक्ष बनाते हुए ‘नव-वेदान्तवादी’ दृष्टि से किया है। जीवन और जगत्‌ के प्रति मायावादी दृष्टिकोण का नकार और जगत्‌ की यथातथ्यता की स्वीकृति तथा वेदान्ती विश्वदृष्टि में ही प्रगतिशील एवं रचनात्मक जीवन के लिए अधिकाधिक अवकाश निर्मित करना नव-वेदान्ती चिन्तन की प्रस्थानमूलक विशिष्टता रही है। साथ ही साथ नव-वेदान्ती चिन्तन में उन सामाजिक-सांस्कृतिक विकारों के प्रति भी एक सशक्त आत्मचेतना दिखाई पड़ती है जिन्हें वेदान्त………..

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam
Author
CategorySocial PDF Books In Hindi Spiritual PDF Book in Hindi
Language
Pages 641
Quality Good
Size 143 MB
Download Status Available
“हमें परिमित निराशा को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन अपरिमित आशा को कभी नहीं खोना चाहिए।” मार्टिन लूथर किंग, जूनियर (१९२९-१९६८), अश्वेत मानवाधिकारी नेता
“We must accept finite disappointment, but never lose infinite hope.” Martin Luther King, Jr. (1929-196), Black civil-rights leader

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