वेदान्त : श्री चक्रवर्ती गोपालाचार्य द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Vedant : by Shri Chakravarti Gopalacharya Hindi PDF Book

वेदान्त : श्री चक्रवर्ती गोपालाचार्य द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Vedant : by Shri Chakravarti Gopalacharya Hindi PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name वेदान्त / Vedant
Author
Category,
Language
Pages 64
Quality Good
Size 1.5 MB
Download Status Available

वेदान्त का संछिप्त विवरण : प्राचीन काल मे इतना विरोध ब्व्हव नहीं था इसका एक कारण यह था की उस समय विज्ञान की इतनी प्रगति नहीं हुई थी । धर्म और दर्शन के उत्सहपूर्ण अनुसरण से विसंगति उत्पन्न नहीं होती थी, वरन मनुष्य बड़ी बड़ी सफलताएँ प्राप्त करते थे। यह इसीलिए संभव हुआ की उन्होने परस्पर विरोधी सिद्धांतो पर विश्वास करने का प्रयत्न नहीं किया………..

Vedant PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Pracheen kaal me itana virodh bvhav nahin tha isaka ek kaaran yah tha kee us samay vigyaan kee itanee pragati nahin huee thee . dharm aur darshan ke utsahapoorn anusaran se visangati utpann nahin hotee thee, varan manushy badee badee saphalataen praapt karate the. yah iseelie sambhav hua kee unhone paraspar virodhee siddhaanto par vishvaas karane ka prayatn nahin kiya…………
Short Description of Vedant PDF Book : One reason why there was no such resistance in ancient times was that there was not so much progress in science at that time. The discrepancy did not arise from the uplifted pursuit of religion and philosophy, but humans used to achieve big successes. This is why it was possible that they did not try to believe in conflicting theories…………..
“मुझे बचपन में ही बता दिया गया था कि मुझे पूर्णतया अपने आप पर निर्भर रहना होगा; यह भी की मेरा भविष्य मेरे हाथ में ही है।” डेरियस ओग्डेन मिल्स
“I was taught very early that I would have to depend entirely upon myself; that my future lay in my own hands.” Darius Ogden Mills

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