मेरा मुझमें कुछ नहीं / Mera Mujhamen Kuchh Nahin
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मेरा मुझमें कुछ नहीं पुस्तक का कुछ अंश : लेकिन अपने से बाहर उठे बिना मार्ग न मिलेगा। तुम ही खोजोगे, तुम्हारी खोज तुम्हारे अंधकार की ही खोज होगी। तुम ही सोचोगे, तुम्हारा सोचना तुम्हारे अनुभव के पार न जाएगा। और बहुत-बहुत बार एक ही उलझन में उलझे रहने से अनेक परिणाम होते हैं। या तो उलझन दिखाई ही पड़ना बंद हो जाती है, तुम आदी हो जाते हो। बहुत लोग आदी हो गए हैं अंधकार के। उन्होंने खोज ही बंद कर दी……….
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | मेरा मुझमें कुछ नहीं / Mera Mujhamen Kuchh Nahin |
| Author | Osho Hindi PDF Books |
| Category | Social PDF Books In Hindi Spiritual PDF Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 183 |
| Quality | Good |
| Size | 1790 KB |
| Download Status | Available |
“हर कोई प्रतिभाशाली होता है। लेकिन अगर आप मछली को उसकी पहाड़ पर चढ़ पाने की क्षमता से आंकेंगे तो वह जीवनभर अपने आपको नालायक ही मानती रहेगी।” अल्बर्ट आइन्सटाइन
“Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb, it will live its whole life believing that it is stupid.” Albert Einstein
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