मेरा मुझमें कुछ नहीं / Mera Mujhamen Kuchh Nahin
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मेरा मुझमें कुछ नहीं पुस्तक का कुछ अंश : लेकिन अपने से बाहर उठे बिना मार्ग न मिलेगा। तुम ही खोजोगे, तुम्हारी खोज तुम्हारे अंधकार की ही खोज होगी। तुम ही सोचोगे, तुम्हारा सोचना तुम्हारे अनुभव के पार न जाएगा। और बहुत-बहुत बार एक ही उलझन में उलझे रहने से अनेक परिणाम होते हैं। या तो उलझन दिखाई ही पड़ना बंद हो जाती है, तुम आदी हो जाते हो। बहुत लोग आदी हो गए हैं अंधकार के। उन्होंने खोज ही बंद कर दी……….
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | मेरा मुझमें कुछ नहीं / Mera Mujhamen Kuchh Nahin |
| Author | Osho Hindi PDF Books |
| Category | Social PDF Books In Hindi Spiritual PDF Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 183 |
| Quality | Good |
| Size | 1790 KB |
| Download Status | Available |
“हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ होता है। बिना स्वार्थ के कोई मित्रता नहीं होती। यह एक दुःखद सत्य है।” ‐ चाणक्य
“There is some self-interest behind every friendship. There is no friendship without self- interests. This is a bitter truth.” ‐ Chanakya
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