मेरी प्रिय कहानियाँ : मोहन राकेश | Meri Priy Kahaniya : By Mohan Rakesh Hindi Book

मेरी प्रिय कहानियाँ : मोहन राकेश | Meri Priy Kahaniya : By Mohan Rakesh Hindi Book
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पुस्तक के कुछ अंश : नये दौर की मेरी अधिकांश कहानियाँ सम्बन्धों की यन्त्रणा को अपने अकेलेपन में झेलते लोगों की कहानियाँ हैं जिनमें हर इकाई के माध्यम से उसके परिवेश को अंकित करने का प्रयत्न है। यह अकेलापन समाज से कटकर व्यक्ति का अकेलापन नहीं समाज के बीच होने का अकेलापन है और उसकी परिणति भी किसी तरह के सिनिसिज्म में नहीं, झेलने की निष्ठा में है। व्यक्ति और समाज को परस्पर-विरोधी एक दूसरे से भिन्न और आपस में कटी हुई इकाइयाँ न मानकर यहाँ उन्हें एक ऐसी अभिन्नता में देखने का प्रयत्न है जहाँ व्यक्ति समाज की विडम्बनाओं का और समाज व्यक्ति की यन्त्रणाओं का आईना है।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मेरी प्रिय कहानियाँ | Meri Priy Kahaniya
Author
CategoryStory Book PDF in Hindi
Language
Pages 124
Quality Good
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“अपने माता पिता से आप प्रेम और हंसी सीखते हैं और पांव पांव चलना भी। लेकिन किताबें खुलने पर आपको पता चलता है कि आपके तो पर भी हैं।” ‐ हेलन हेज़
“From your parents you learn love and laughter and how to put one foot before the other. But when books are opened you discover that you have wings.” ‐ Helen Hayes

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