मेरी प्रिय कहानियाँ : मोहन राकेश | Meri Priy Kahaniya : By Mohan Rakesh Hindi Book
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पुस्तक के कुछ अंश : नये दौर की मेरी अधिकांश कहानियाँ सम्बन्धों की यन्त्रणा को अपने अकेलेपन में झेलते लोगों की कहानियाँ हैं जिनमें हर इकाई के माध्यम से उसके परिवेश को अंकित करने का प्रयत्न है। यह अकेलापन समाज से कटकर व्यक्ति का अकेलापन नहीं समाज के बीच होने का अकेलापन है और उसकी परिणति भी किसी तरह के सिनिसिज्म में नहीं, झेलने की निष्ठा में है। व्यक्ति और समाज को परस्पर-विरोधी एक दूसरे से भिन्न और आपस में कटी हुई इकाइयाँ न मानकर यहाँ उन्हें एक ऐसी अभिन्नता में देखने का प्रयत्न है जहाँ व्यक्ति समाज की विडम्बनाओं का और समाज व्यक्ति की यन्त्रणाओं का आईना है।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | मेरी प्रिय कहानियाँ | Meri Priy Kahaniya |
| Author | Mohan Rakesh |
| Category | Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 124 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“जिंदगी का मेरा सूत्र बहुत ही सरल है। मैं सुबह जागता हूं तथा रात को सो जाता हूं। इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं।” ‐ केरी ग्रांट
“My formula for living is quite simple. I get up in the morning and I go to bed at night. In between, I occupy myself as best I can.” ‐ Cary Grant
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