जिन्दगी खामोश कहाँ : मोहम्मद इरशाद | Jindgi Khamosh Kahan : By Mohammad Irshad Hindi Book

जिन्दगी खामोश कहाँ : मोहम्मद इरशाद | Jindgi Khamosh Kahan : By Mohammad Irshad Hindi Book
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जिन्दगी खामोश कहाँ पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : या रब मुझको ऐसा जीने का हुनर दे जो मुझसे मिले इंसाँ उसे मेरा कर दे
नफरत बसी हुई है जिन लोगों के दिल में परवरदिगार उनको मुहब्बत से भर दे मैं ख़ुद के ऐब देखूं ओ लोगों की खूबियाँ अल्लाह जो दे तो मुझे ऐसी नजर दे बेखौफ जी रहा हूँ गुनहगार हो गया दुनिया का नहीं दिल को मेरे अपना ही डर दे
जो लोग भटकते हैं दुनिया में दरबदर मोती का ना सही उन्हें तिनकों का तो घर दे हर हाल में करते हैं जो शुक्र अदा तेरा ‘इरशाद’ को भी मौला उनमें शुमार कर दे

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जिन्दगी खामोश कहाँ | Jindgi Khamosh Kahan
Author
CategoryGhazal Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi
Language
Pages 84
Quality Good
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“अगर सफलता आपके आदर्शों से मेल नहीं खाती – यदि यह दुनिया को अच्छी लगती हो लेकिन आपको अपने मन में नहीं अच्छी लगती – तो यह सफलता नहीं है।” ‐ एना क्विन्ड्लेन
“If success is not on your terms – if it looks good to the world but does not feel good in your own heart – it is no success at all.” ‐ Anna Quindlen

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