जिन्दगी खामोश कहाँ : मोहम्मद इरशाद | Jindgi Khamosh Kahan : By Mohammad Irshad Hindi Book
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जिन्दगी खामोश कहाँ पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : या रब मुझको ऐसा जीने का हुनर दे जो मुझसे मिले इंसाँ उसे मेरा कर दे
नफरत बसी हुई है जिन लोगों के दिल में परवरदिगार उनको मुहब्बत से भर दे मैं ख़ुद के ऐब देखूं ओ लोगों की खूबियाँ अल्लाह जो दे तो मुझे ऐसी नजर दे बेखौफ जी रहा हूँ गुनहगार हो गया दुनिया का नहीं दिल को मेरे अपना ही डर दे
जो लोग भटकते हैं दुनिया में दरबदर मोती का ना सही उन्हें तिनकों का तो घर दे हर हाल में करते हैं जो शुक्र अदा तेरा ‘इरशाद’ को भी मौला उनमें शुमार कर दे
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | जिन्दगी खामोश कहाँ | Jindgi Khamosh Kahan |
| Author | मोहम्मद इरशाद / Mohammad Irshad |
| Category | Ghazal Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 84 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“आप पूछते हैं: जीवन का उद्देश्य और अर्थ क्या है? मैं इसका उत्तर केवल एक अन्य प्रश्न से दे सकता हूं: क्या आपके विचार से हम भगवान की सोच को समझने के लिए पर्याप्त बुद्धिमत्ता रखते हैं?” फ्रीमैन डायसन
“You ask: what is the meaning or purpose of life? I can only answer with another question: do you think we are wise enough to read God’s mind?” Freeman Dyson
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