जिन्दगी खामोश कहाँ : मोहम्मद इरशाद | Jindgi Khamosh Kahan : By Mohammad Irshad Hindi Book

जिन्दगी खामोश कहाँ : मोहम्मद इरशाद | Jindgi Khamosh Kahan : By Mohammad Irshad Hindi Book
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जिन्दगी खामोश कहाँ पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : या रब मुझको ऐसा जीने का हुनर दे जो मुझसे मिले इंसाँ उसे मेरा कर दे
नफरत बसी हुई है जिन लोगों के दिल में परवरदिगार उनको मुहब्बत से भर दे मैं ख़ुद के ऐब देखूं ओ लोगों की खूबियाँ अल्लाह जो दे तो मुझे ऐसी नजर दे बेखौफ जी रहा हूँ गुनहगार हो गया दुनिया का नहीं दिल को मेरे अपना ही डर दे
जो लोग भटकते हैं दुनिया में दरबदर मोती का ना सही उन्हें तिनकों का तो घर दे हर हाल में करते हैं जो शुक्र अदा तेरा ‘इरशाद’ को भी मौला उनमें शुमार कर दे

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जिन्दगी खामोश कहाँ | Jindgi Khamosh Kahan
Author
CategoryGhazal Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi
Language
Pages 84
Quality Good
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“लम्बी आयु का महत्त्व नहीं है जितना महत्त्व इसकी गहनता है।” राल्फ वाल्डो एमर्सन
“It is not length of life, but depth of life, which is important.” Ralph Waldo Emerson

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