मासूमा : इस्मत चुगताई | Masooma: By Ismat Chughtai Hindi Book

Masooma: By Ismat Chughtai Hindi Book
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मासूमा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : यह उपन्यास एक मासूम लड़की के बारे में है जिसका नाम भी उसकी माँ ने मासूमा ही रखा था, लेकिन ज़माने ने जिसे बाद में नाम दिया- नीलोफर, और जो औरत होने से पहले ही ऐसी कुछ हो गई कि जो खुद उसकी भी समझ से परे था।
इस्मत चुगताई की सधी कलम का यह शाहकार अपने वक्त की उस औरत की अक्काशी करता है जिसके पास अगर खूबसूरत जिस्म न हो, उसे चाहनेवाले पतिंगे न हों, तो वह कुछ नहीं रह जाती और अगर हों तो भूखे भेड़ियों की हवस की गेंद बनकर रह जाती है। इस्मत इस उपन्यास में औरत की यह हौलनाक तस्वीर खींचकर जैसे हर युग की औरतों को चेता रही हैं और कहने की जरूरत नहीं कि इक्कीसवीं सदी की चमक-दमक से चौथियाई हमारी असंख्य उदास, नीम अँधेरी गलियों में आज भी ऐसी मासूम रूहें परवान चढ़ रही है, जिनको अगर एक मजबूत चारदीवारी नसीब न हो तो वे जाने किस राह पर लावारिस पत्थर का टुकड़ा होकर जा रहें, जहाँ कोई भी आता-जाता उनसे खेले और ठुकराकर चलता बने।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मासूमा | Masooma
Author
CategoryNovel in Hindi PDF Book
Language
Pages 144
Quality Good
Download Status Not for Download
“बीस साल की उम्र में इंसान अपनी मर्ज़ी से चलता है, तीस में बुद्धि से और चालीस में विवेक से।” बेंजामिन फ्रैंकलिन
“At twenty years of age the will reigns; at thirty, the wit; and at forty, the judgment.” Benjamin Franklin

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