मासूमा : इस्मत चुगताई | Masooma: By Ismat Chughtai Hindi Book
मासूमा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : यह उपन्यास एक मासूम लड़की के बारे में है जिसका नाम भी उसकी माँ ने मासूमा ही रखा था, लेकिन ज़माने ने जिसे बाद में नाम दिया- नीलोफर, और जो औरत होने से पहले ही ऐसी कुछ हो गई कि जो खुद उसकी भी समझ से परे था।
इस्मत चुगताई की सधी कलम का यह शाहकार अपने वक्त की उस औरत की अक्काशी करता है जिसके पास अगर खूबसूरत जिस्म न हो, उसे चाहनेवाले पतिंगे न हों, तो वह कुछ नहीं रह जाती और अगर हों तो भूखे भेड़ियों की हवस की गेंद बनकर रह जाती है। इस्मत इस उपन्यास में औरत की यह हौलनाक तस्वीर खींचकर जैसे हर युग की औरतों को चेता रही हैं और कहने की जरूरत नहीं कि इक्कीसवीं सदी की चमक-दमक से चौथियाई हमारी असंख्य उदास, नीम अँधेरी गलियों में आज भी ऐसी मासूम रूहें परवान चढ़ रही है, जिनको अगर एक मजबूत चारदीवारी नसीब न हो तो वे जाने किस राह पर लावारिस पत्थर का टुकड़ा होकर जा रहें, जहाँ कोई भी आता-जाता उनसे खेले और ठुकराकर चलता बने।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | मासूमा | Masooma |
| Author | ismat chugtai |
| Category | Novel Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 144 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“हे भगवान, मुझे उन बातों को स्वीकार करने का धैर्य प्रदान करो जिन्हें मैं बदल नहीं सकता हूं; जिन चीजों को मैं बदल सकता हूं उनको बदलने का साहस दो; तथा इन दोनों में अंतर करने के लिए बुद्धि प्रदान करो।” ‐ डा. रीनहोल्ड नीबुहर
“God, grant me the serenity to accept things that I cannot change; The courage to change the things I can; And the wisdom to know the difference.” ‐ Dr. Reinhold Niebuhr
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