अपना आधार ही मुझ को छल गया : प्रफुल्ल कोलख्यान द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कविता | Apna Adhar Hi Mujhko Chhal Gya : by Prafull Kolakhyan Hindi PDF Book – Poem (Kavita)

अपना आधार ही मुझ को छल गया : प्रफुल्ल कोलख्यान द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कविता | Apna Adhar Hi Mujhko Chhal Gya : by Prafull Kolakhyan Hindi PDF Book - Poem (Kavita)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name अपना आधार ही मुझ को छल गया / Apna Adhar Hi Mujhko Chhal Gya
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 2
Quality Good
Size 163 KB
Download Status Available

अपना आधार ही मुझ को छल गया  पीडीऍफ़ पुस्तक का संछिप्त विवरण :  यह उगता सूरज भी मुझ से उतना ही दूर है जितना कल डूबता हुआ सूरज मुझ से दूर था
आदमी आज उतना ही नहीं, उससे भी अधिक अपनी करनी से मजबूर है, जितना कल था कितना कातर हो
गया मैं यह पता जब चल गया कोई और नहीं अपना आधार ही मुझ को छल गया…

Apna Adhar Hi Mujhko Chhal Gya PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Yah Ugta Sooraj bhi Mujh se utana hi door hai jitana kal doobata huya Sooraj mujh se door tha Admi Aaj utana hi nahin, usase bhi adhik apni karni se majboor hai, jitana kal tha kitana katar ho gaya main yah pata jab chal gaya koi aur nahin apana aadhaar hee mujh ko chhal gaya………

Short Description of Apna Adhar Hi Mujhko Chhal Gya Hindi PDF Book  : This rising sun is also as far away from me as yesterday the setting sun was away from me, man is not as much today, even more is compelled by his actions, as much as it was yesterday, when I came to know that no one else I was deceived by my own base…….

 

“बुद्धि का अर्जन हम तीन तरीकों से कर सकते हैं: प्रथम, चिंतन से, जो कि उत्तम है; द्वितीय, दूसरों से सीखकर, जो सबसे आसान है; और तृतीय, अनुभव से, जो सबसे कठिन है।” ‐ कन्फ़्यूशियस
“By three methods we may learn wisdom: First, by reflection, which is noblest; Second, by imitation, which is easiest; and third by experience, which is the bitterest.” ‐ Confucious

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

Check Competition Books in Hindi & English - कम्पटीशन तैयारी से सम्बंधित किताबें यहाँ क्लिक करके देखें

Leave a Comment