बिंदास जीवन कैसे जिएँ : सरश्री द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Bindas Jeevan Kaise Jiyen : by Sirshree Hindi Audiobook
Bindas Jeevan Kaise Jiyen Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : जो लोग बिंदास होते हैं, वे प्रयोग करते हैं और उन्हें जमाना याद करता है। बाद में लोग यह भी कहते हैं कि ‘हमें लगा ही था इस बंदे में कुछ तो बात है; इस बंदे में कुछ तो खास है; इस बंदे में कुछ तो था, बंदे में था दम। लोग बाद में कहते हैं, पहले नहीं कहते। पहले कहेंगे, ‘क्या पागल हुआ है जीरो से स्टार्ट कर रहा है, सब वेस्ट हो गया तुम्हारा।’तो बिंदास बनने के साथ क्या करना है, यह टॉपिक आपको समझ में आ रही होगी। अब समझें इसको कि यह इतना हौआ (शैतान का बच्चा) क्यों बन गया है। इतना बड़ा हौआ क्यों है ? लोग क्या कहेंगे ? होता ऐसा है कि एक रियल घटना होती है। सचमुच आपके जीवन में होता है कुछ, काल्पनिक नहीं था, वह सचमुच हुआ था। क्या हुआ था ?
प्यारे बिंदास से भी आगे जाने वाले खोजियो! आप सबको शुभेच्छा, हँपी थॉट्स। एक इंसान ने अपने मित्र को बताया, उस दिन कुछ लोग एक गाय को पिटते हुए ले जा रहे थे तो मैंने उन्हें रोका और कहा, “जानवरों पर अत्याचार करते हो, हिम्मत है तो इंसान को हाथ लगाकर दिखाओ ! मित्र ने पूछा, ‘फिर क्या हुआ? उस इंसान ने कहा, ‘पता नहीं चला, सीधे हॉस्पिटल में ही आँख खुली। आपको ऐसा बिंदास नहीं बनना है। “बिंदास जीवन कैसे जीएँ? यह पढ़कर किसी के मन में आया हो कि हमें शरीर से बिंदास बनना है। मगर यह शरीर से बिंदास बनने वाली बात नहीं है। यह मन और मन से आगे बिंदास बनने वाली बात है। इसलिए शुरुआत में ही कहा, ‘बिंदास से आगे जाने वाले खोजियों। ‘मन से बिंदास बनने से आप तनाव से तो मुक्त होते ही हैं मगर मन से आगे बिंदास बनने पर आप तनाव मुक्ति से भी आगे जाकर बिंदास बनते हैं।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| AudioBook Name | बिंदास जीवन कैसे जिएँ / Bindas Jeevan Kaise Jiyen |
| Author | Sirshree |
| Category | Hindi Audiobooks Motivational Book in Hindi Social PDF Books In Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Duration | 2:08 hrs |
| Source | Youtube |
“रोटी या सुरा या लिबास की तरह कला भी मनुष्य की एक बुनियादी ज़रूरत है। उसका पेट जिस तरह से खाना मांगता है, वैसे ही उसकी आत्मा को भी कला की भूख सताती है।” इरविंग स्टोन
“Art’s a staple. Like bread or wine or a warm coat in winter. Those who think it is a luxury have only a fragment of a mind. Man’s spirit grows hungry for art in the same way his stomach growls for food.” Irving Stone
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