Campus : By K.L. Kamal Hindi Book | कैम्पस : के.एल. कमल द्वारा हिंदी पुस्तक
कैम्पस पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : वरिष्ठ कथाकार के. एल. कमल का उपन्यास ‘कैम्पस हमारा ध्यान वर्तमान समय के सबसे बड़े संकट- उपभोक्तावाद और बाजारवाद की ओर खींचता है, जिसने हमारे सांस्कृतिक मूल्यों, आयामों और संस्थानों को क्षत-विक्षत कर दिया है।
यह कथा बताती है कि अधिकांश विश्वविद्यालय आज ज्ञान, शोध, सृजन एवं संस्कारों के मंदिर न होकर क्षुद्र राजनीति, अहंकार, बड़बोलेपन, जातीयता, संकीर्णता, मर्यादाहीनता एवं अशैक्षणिक गतिविधियों के गढ़ बनकर रह गए हैं। ऐसे अराजक, कुंटायुक्त परिवेश में कैसी होती है एक कुलपति की मनःस्थिति, इसका दारुण चित्रण कथाकार ने उपन्यास में बड़ी रोचकता से किया है।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | कैम्पस | Campus |
| Author | K.L. Kamal |
| Category | Novel in Hindi PDF Book |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 152 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“अपने सम्मान की बजाय अपने चरित्र के प्रति अधिक गम्भीर रहें। आपका चरित्र ही यह बताता है कि आप वास्तव में क्या हैं जबकि आपका सम्मान केवल यही दर्शाता है कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं।” – जॉन वुडन
“Be more concerned with your character than with your reputation. Your character is what you really are while your reputation is merely what others think you are.” – John Wooden
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