धन्ध्लेश्वर : गोपाल चतुर्वेदी | Dhandhleshwar : By Gopal Chaturwedi Hindi Book
धन्ध्लेश्वर पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : वर्तमान समय में व्यंग्य के रचनाकारों में गोपाल चतुर्वेदी का नाम शीर्षस्थ है। विषयों के वैविध्य और विसंगतियों को रचाव के साथ प्रस्तुत करते हुए वे मूल्यों के बचाव के प्रति सजग रहते हैं। देश- दुनिया के चप्पे-चप्पे, वस्तु जगत के रेशे- रेशे, भाँति-भाँति के मानवीय स्वभाव के चितेरे गोपाल चतुर्वेदी उसके अन्तरंग और बहिरंग का खाका कुछ इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि पाठक वाह वाह कर उठता है। गोपाल चतुर्वेदी ने नौकरशाही, लालफीताशाही और अफसरशाही को इतना नजदीक से देखा है कि उनके बेवाक विश्व में उन्हें अपनी कलम का कमाल दिखाने का मौका मिल गया। सरकार में उच्च पदों पर वर्षों रहने के बावजूद उन्होंने बाबुओं के दर्द को भी बखूबी समझा कि उसमें से करुणा के कणों को बटोरने में वे पूर्णतः सफल हो सके। इसी कारण गोपाल चतुर्वेदी प्रामाणिक व्यंग्य के लेखक के रूप में स्वयं सामने आये।
Enjoy your next Hindi read right here
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | धन्ध्लेश्वर | Dhandhleshwar |
| Author | गोपाल चतुर्वेदी / Gopal Chaturwedi |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Entertainment Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 508 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“जीवन की आधी असफलताओं का कारण व्यक्ति का अपने घोड़े के छ्लांग लगाते समय उसकी लगाम खींच लेना होता है।” ‐ चार्ल्स हेयर
“Half the failures of this world arise from pulling in one’s horse as he is leaping.” ‐ Augustus Hare
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें












