फ्रीज़ मे औरत : मुशर्रफ आलम ज़ौक़ी | Frij Main Aurat : By Musharraf Alam Zauqi Hindi Book
फ्रीज़ मे औरत पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : जेनी को कुत्ते और बिल्ली पसन्द नहीं थे वह जब भी इन्हें देखती, नफरत से मुँह सिकोड़ लेती रास्ता चलते किसी जानवर पर उसकी नज़र पड़ जाती तो उसका अच्छा-खासा मूड खराब हो जाता। घर आकर वह काफी हंगामा मचाती।
हैं ?” “डियर ये लोग जानवरों को घर में बाँधकर क्यों नहीं रखते। खुला छोड़ देते “पता नहीं।” “नहीं, तुम्हें सब पता है तुम मर्द अच्छी तरह जानते हो भद्र और शिष्ट महिलाएँ इस तरह खुलेआम जानवरों के घूमने को पसन्द नहीं करतीं तुम्हारा जी चाहे, तो तुम औरतों का सड़कों पर घूमना ही बन्द करा दो।” जेनी इसके बाद भी लगातार बोलती रहती। एक बार मूड उखड़ गया तो उखड़ गया। जज्बाती औरत उसे जेनी की नाराजगी पर कभी क्रोध नहीं आया। वह जानता था गुस्सैल औरत के यहाँ जज्बात की गर्मी होती है। वह जज्बात भीतर सँभालकर नहीं रखती, बल्कि सब कुछ सामने वाले पर किसी सच्चे और ईमानदार व्यक्ति की तरह उड़ेल देती है…।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | फ्रीज़ मे औरत | Frij Main Aurat |
| Author | मुशर्रफ आलम ज़ौक़ी / Musharraf Alam Zauqi |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Entertainment Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 142 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“इस धरा पर जैसा कोई विषय नहीं जो अरुचिकर हो; यदि ऐसा कुछ है तो वह एक बेसरोकार व्यक्ति ही हो सकता है।” – जी.के.चेस्टरटन
“There is no such thing on earth as an uninteresting subject; the only thing that can exist is an uninterested person.” – G. K. Chesterton
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