कुछ आध्यात्मिक सूत्र : एस. के. डोडेजा | Kuch Adhyatmik Sutra : By S. K. Dodeja Hindi Book
कुछ आध्यात्मिक सूत्र पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : जीवन व्यवस्थित ढंग से जीना भी एक कला है सफल एवं व्यवस्थित जीवन जीने के लिये श्रेष्ठ प्रबंधन क्षमता का होना अत्यंत आवश्यक है और सफल प्रबंधन के लिये आध्यात्मिक सूत्रों का ज्ञान होना भी नितांत आवश्यक है। यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण विद्या है जिसे हर युवा जिज्ञासु मानव को जानना चाहिये। खेद का विषय है कि आज प्रबंधन के बारे में तो काफी कुछ पढ़ाया जा रहा है पर सफल प्रबंधन हेतु आध्यात्मिकता किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकती है, इस विषय पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
संबंधित कार्यों को 40 वर्षों के दीर्घ सेवाकाल के पश्चात् 2008 में, में सेवानिवृत्त होकर शायद जीवन के अगले मोड़ पर समाज सेवा से करने की ओर अग्रसर हो जाऊँगा। इस काल में 28 वर्ष से अधिक एन.एच.पी.सी. की सेवा में व्यतीत हुए हैं, जहाँ में सहायक प्रबंधक से कार्य प्रारंभ कर निदेशक के पद पर आसीन हो पाया व इस दीर्घ काल में देश व संगठन के लिये बहुत कुछ जल विद्युत विकास के क्षेत्र में कर भी पाया जहाँ संगठन में में एक सफल प्रबंधक के रूप में जाना जाता रहा, वहीं व्यक्तिगत तौर पर संतुष्टि के ऊँचे स्तर तक मैंने स्वयं को पाया। पीछे मुड़कर यदि गहराई से विश्लेषण करूँ तो अनुभव करता हूँ। कि ईश्वर की मुझ पर अपार कृपा बचपन से ही रही है, अन्यथा एक सामान्य मेट/ मैकेनिक के पद पर काम करने वाले व्यक्ति के घर में जन्म पाव कुछ शिक्षा प्राप्त कर में देश व संगठन के लिये इतना सब कुछ कर पाऊँगा, ऐसा कभी सोचा भी न था वह स्वप्न के समान लगता था जो वास्तव में स्वप्न नहीं सत्य सिद्ध हुआ।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | कुछ आध्यात्मिक सूत्र | Kuch Adhyatmik Sutra |
| Author | एस. के. डोडेजा / S. K. Dodeja |
| Category | शिक्षा / Educational Hindi Books कहानी संग्रह / Story Collections ज्ञान / Knowledge Hindi Books Kahani Kahaniyan Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 258 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“अज्ञानी व्यक्ति वह प्रश्न पूछते हैं जिनका उत्तर समझदार व्यक्तियों द्वारा एक हजार वर्षों पहले दे दिया गया होता है।” ‐ गोएथ
“Ignorant men raise questions that wise men answered a thousand years ago.” ‐ Goethe
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