मरी मछलियो का तालाब : तपन त्रिपाठी | Mari Machalio Ka Talab : By Tapan Tripathi Hindi Book

मरी मछलियो का तालाब : तपन त्रिपाठी | Mari Machalio Ka Talab : By Tapan Tripathi Hindi Book
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मरी मछलियो का तालाब पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : “चंदा सूरज के मैं, पईयाँ परत हों, तिरिया जनम झन दे हो सुअना हो…. तिरिया जनम झन दे।”
चम्पा, बुधियारिन, रामबाई, बेनवती के साथ और भी पाँच छ औरतें गोल घेरा-सा बनाकर,
घेरे के बीच में एक चरिया के काठ के बने तोते को रखकर गाते हुए नाच रही है। अपने इस लोक गीत के माध्यम से न जाने कितनी सारी समस्याओं का निदान एक साथ मांग रही हैं, उस तोते से, काठ के तोते से।
त्यौहार के दस पन्द्रह दिन पूर्व से ही सुआ गीत गाने का क्रम चालू हो जाता है। हर घर के आँगन में आकर सुआ गीत गाना, उन्हें आशीष देना व जहाँ से जितना मिल जाए चन्दा उगाहना ।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मरी मछलियो का तालाब | Mari Machalio Ka Talab
Author
CategoryFiction Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF
Language
Pages 68
Quality Good
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“हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में। मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी। कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है। मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।” ग्रोचो मार्क्स
“Each morning when I open my eyes I say to myself: I, not events, have the power to make me happy or unhappy today. I can choose which it shall be. Yesterday is dead, tomorrow hasn’t arrived yet. I have just one day, today, and I’m going to be happy in it.” Groucho Marx

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