Priya : By Namita Gokhale Hindi Book | प्रिया : नमिता गोखले द्वारा हिंदी पुस्तक

Priya : By Namita Gokhale Hindi Book | प्रिया : नमिता गोखले द्वारा हिंदी पुस्तक
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प्रिया पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : ‘…मेरे भीतर उम्मीद की किरण ने जन्म लिया। हम सब किसी-न-किसी तरह सब बाधाओं से पार होंगे। मेरा भारत और लेनिन का भारत और जिमी बटाटा का भी और नट आशा का इंडिया भी हम कलह, क्लेश, आइडियोलॉजी, न्यूमरोलॉजी और करप्शन इन सबसे पार पा लेंगे। आज और आने वाले कलों में भी, भारत आगे ही आगे बढ़ता जाएगा।’ सुरेश कौशल शाइनिंग इंडिया में राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते हुए शिखर पर पहुंच गया। अब वह मंत्री था। उसकी पत्नी प्रिया को भाग्य पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। वह आश्वस्त होना चाहती थी कि जो कुछ मिला है, वह समाप्त न हो जाए। वह समाज के दुष्चक्रों से बहादुरी के साथ मुकाबला करती है। बेवफाई और मोनोपॉज़ से बचने की भी कोशिश करती है। उसने इस सबके बीच जिंदा रहने के ज़रूरी पाठ भी पढ़ लिए थे ‘सब तरफ देखो, सब की सुनो और मौन साध लो!’ प्रिया का जबरदस्त आशावाद ही उसके जीवन का कवच बना और वह सफल होती गई।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name प्रिया | Priya
Author
CategoryLiterature Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF
Language
Pages 230
Quality Good
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“हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में। मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी। कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है। मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।” ग्रोचो मार्क्स
“Each morning when I open my eyes I say to myself: I, not events, have the power to make me happy or unhappy today. I can choose which it shall be. Yesterday is dead, tomorrow hasn’t arrived yet. I have just one day, today, and I’m going to be happy in it.” Groucho Marx

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