स्वदेशी रेल : शौकत थानवी | Swadeshi Rail : By Shaukat Thanvi Hindi Book
स्वदेशी रेल पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : दिन भर के थके-हारे थे और रात को यात्रा भी करनी थी, पर ‘वन्दे मातरम्’ की आवाज़ पर कान खड़े कर लेना हमारी सदा की आदत है और वन्दे मातरम्’ नारे को भी कुछ हम से ही जिद्द थी कि हमारा जो भी हाल हो, बीमार हो, किसी आवश्यक काम से बाहर जा रहे हों या कोई और मजबूरी हो मगर वह कुछ नहीं देखता और हमें अपनी ओर आने पर विवश कर देता है। सो आज भी यही हुआ कि हुक्का सुराहियां एक दुकान पर यह कह
कर रख दी कि हम अभी एक बन्धुवर जो सूरत से गांधी टोपी, दाढ़ी मूंछ से
आए और सीधे पंडाल में घुस गए जहां नेता लगते थे अर्थात् सिर पर गाढ़े को फारिग एक लम्बा-सा सदर का कुर्ता, टांगों में खद्दर की योती और चप्पल पहने हुए थे, एक हाथ अपनी कमर पर रखे दूसरे हाथ को भीड़ की ओर उठाए इस प्रकार हिला रहे थे जैसे बैंड मास्टर अपनी छड़ी को हिलाता है। वह कुछ कह भी रहे थे पर मालूम नहीं क्या कह रहे थे इसलिए कि वह बोलते-बोलते कभी पूरब की ओर पूरी तरह घूम जाते और कभी पश्चिम की ओर और कभी-कभी तो एकदम पीछे की ओर मुड़ जाते थे। बहरहाल इस निश्चय पर पहुंचना कि हम उनके पीछे खड़े हैं अथवा सामने बड़ा मुश्किल था इसलिये कि स्वयं उन्हें कार नहीं था जिस तरुत, जिसे आप स्टेज कह सकते हैं, पर
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | स्वदेशी रेल | Swadeshi Rail |
| Author | Shaukat Thanvi |
| Category | Novel Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 132 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“विश्व की सबसे सुन्दरतम वस्तुओं को देखा या छुआ भी नहीं जा सकता है, उन्हें केवल दिल से महसूस किया जा सकता है।” ‐ हेलन केलर
“The most beautiful things in the world cannot be seen or even touched, they must be felt with the heart.” ‐ Helen Keller
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