याद की रहगुजर : शौकत कैफ़ी | Yaad Ki Rahgujar : By Shaukat Kaifi Hindi Book
याद की रहगुजर पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : ‘याद की रहगुज़र’ शीकत कैफ़ी की वह दास्तान है जिसमें उनके शोहर उर्दू के मशहूर शायर और नगमानिगार कैफ़ी आज़मी और उनके बच्चों एक्ट्रेस शबाना आज़मी और कैमरामैन बाबा आज़मी के खूबसूरत और दिलचस्प किस्से हैं। इसमें प्रगतिशील लेखक आन्दोलन से जुड़े हुए कवियों और लेखकों का ज़िक है। ऊँचे सामाजिक मूल्यों के लिए संघर्ष करने वाले किरदार हैं।
शोकल कैफ़ी स्टेज और फिल्म की एक बहुत मँजी हुई और बेमिसाल अभिनेत्री भी हैं। ‘याद की रहगुज़र’ में उन्होंने इप्टा और पृथ्वी वियेटर से जुड़े हुए अपने दिनों के बारे में कई अनोखी बातें लिखी हैं। ‘याद की रहगुज़र’ शोकत कैफ़ी के बहुरंगी अनुभवों का बयान है जिसमें जीवन के ठंडे और गरम मौसमों की तस्वीरें हैं। मानवमन का रोमांस है, हिम्मत और विजय की भावना है। बहुत सादा लेकिन अर्थपूर्ण यह लेखन पाठक के दिल और दिमाग में अतीत से प्रेम और भविष्य के प्रति आस्था जगाता है।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | याद की रहगुजर | Yaad Ki Rahgujar |
| Author | शौकत कैफ़ी / Shaukat Kaifi |
| Category | Biography Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 176 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“हम जब तक खुद मां बाप नहीं बन जाएं, मां बाप का प्यार कभी नहीं जान पाते।” हेनरी वार्ड बीचर, (१८१३-१८८७), अमरीकी पादरी
“We never know the love of a parent till we become parents ourselves.” Henry Ward Beecher, (1813-1887), American Clergyman
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