Vinayak: By Rameshchandra Shah Hindi Book | विनायक : रमेशचंद्र साह द्वारा हिंदी पुस्तक
विनायक पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : ..जो भी हो, इसका मतलब यही हुआ कि कुछ देना-पावना बचा वा तुम्हारा मेरी तरफ़, जिसे तुम्हें मुझसे वसूल करना ही था।
..दूरबीन लगाकर देखा, तुम खासे फल-फूल रहे हो। सेवा-निवृत्ति की सरहद पर हो, फिर भी एक और लम्बी उलाँग लगाने को तैयार बैठे हो। … इस सबके बीच तुम्हें घर की याद जैसी पिछड़ी और बासी – बूसी चिन्ता क्यों सताने लगी मेरी समझ से बाहर है। देखता हूँ, तुम्हारे भीतर का वह कौतुकी-खिलंदड़ा बीनू अभी भी ज़िन्दा है। अभी भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा।
..उफ! ऐसी भरी-पूरी और फलती-फूलती गिरस्ती के बीचोबीच यह कैसा बवंडर बो दिया तुमने अजीब भँवर में डाल दिया है तुमने मुझे विनायक ! तुम मेरे काबू से बाहर हुए जा रहे हो। मैं क्या करूँ तुम्हारा अब मेरी स्मृति भी मेरा साथ नहीं दे रही। ओह, अब याद आया। स्मृति नहीं, ‘प्रतिस्मृति’ । जानते हो यह क्या होती है?
… पर, विनायक! अब यह मेरी जिम्मेदारी है, तुम्हारी नहीं तुम्हें मैं जहाँ तक देख-सुन सकता था, दिखा-सुना चुका। जितनी दूर तक तुम्हारा साथ दे सकता था, दे चुका। अब तुम अपनी राह चलने को स्वतंत्र हो, और मैं अपनी।
“Click the link to get more Hindi novels in PDF format!”
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | विनायक | Vinayak |
| Author | Ramesh Chandra Shah |
| Category | Literature Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 272 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“इतने अच्छे बने कि आपकी उपेक्षा करने का किसी में साहस ही न हो।” ‐ स्टीव मार्टिन
“Be so good they no one has the courage to ignore you.” ‐ Steve Martin
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें












