हवालात : जगदीश राजवंशी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – उपन्यास | Hawalat : by Jagdish Rajvanshi Hindi PDF Book – Novel (Upanyas)

Book Nameहवालात / Hawalat
Author
Category, , , ,
Language
Pages 94
Quality Good
Size 9 MB

पुस्तक का विवरण : उन्होंने सीधे सादे स्वर में उत्तर दिया, ‘नहीं अभी तो नहीं खाया, लेकिन मैं बाजार में जाकर खा लूंगा।” मैंने कहा, “आप इस वक्‍त कहाँ जाने की तकलीफ करेंगे और अभी मैंने भी खाना नहीं खाया है। मैं तो रोटी खाने जा ही रहा हूँ, उधर से ही आपके लिए पूरी भी लेता आऊंगा। आप आराम कीजिये।” पास में रोटी वाले की एक दुकान थीं………

हवालात : जगदीश राजवंशी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास | Hawalat : by Jagdish Rajvanshi Hindi PDF Book - Novel (Upanyas)

Pustak Ka Vivaran : Unhonne Seedhe Sade svar mein uttar diya, nahin abhi to nahin khaya, Lekin main bazar mein jakar kha loonga. Mainne kaha, aap is vakt kahan jane ki takleeph karenge aur abhi mainne bhi khana nahin khaya hai. Main to Roti khane ja hi raha hoon, udhar se hi Aapke liye poori bhi leta aaunga. Aap Aaram keejiye. Pas mein Roti vale ki ek dukan theen……….

Description about eBook : He replied in a simple voice, ‘No, I haven’t eaten yet, but I will go to the market and eat it’. I am going to eat roti, from there I will also take poori for you. You rest.” There was a roti shop nearby………..

“किसी पुरुष या महिला के पालन-पोषण की आज़माइश तो एक झगड़े में उनके बर्ताव से होती है। जब सब ठीक चल रहा हो तब अच्छा बर्ताव तो कोई भी कर सकता है।” ‐ जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
“The test of a man’s or woman’s breeding is how they behave in a quarrel. Anybody can behave well when things are going smoothly.” ‐ George Bernard Shaw

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