ज़माने की मांग : धीरेन्द्र मजूमदार द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Jamane Ki Mang : by Dheerendra Majumdar Hindi PDF Book – Social (Samajik)

ज़माने की मांग : धीरेन्द्र मजूमदार द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Jamane Ki Mang : by Dheerendra Majumdar Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name ज़माने की मांग / Jamane Ki Mang
Author
Category, , , ,
Language
Pages 59
Quality Good
Size 1 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : जनता को स्वावलम्बन द्वारा होश दिलाने का काम गाधीजी ने जिस ढग बताया, वह नहीं किया गया | वे हमेशा कहते थे कि बेहोश जनता का जन-तंत्र हमेशा भीड़-तंत्र रहेगा | वह केवल भीड़ का जोश होगा, जन-जागरण न होगा | वह नाम मात्र को प्रजातन्त्र कहलावेगा | आज शासन ‘मतों’ पर निर्भर होगा………

Pustak Ka Vivaran : Janata ko svavalamban dvara hosh dilane ka kam Gandheejee ne jis dhang  bataya, vah nahin kiya gaya. Ve hamesha kahate the ki behosh janata ka jan-tantra hamesha bheed-tantra rahega . Vah keval bheed ka josh hoga, jan-Jagaran na hoga. Vah Nam matra ko prajatantra kahalavega. Aaj shasan maton par nirbhar hoga………….

Description about eBook : It was not done by Gandhiji, the way the public was sensitized by Swavalamban. He always used to say that the people’s system of unconscious public will always be crowded. It will only be the passion of the crowd, the public will not be awake. That name will be called a fertility. Today the rule will depend on ‘votes’…………..

“हमारे द्वारा कार्य के लिए लगाए गए समय महत्त्व का इतना नहीं है, जितना महत्त्व इस बात का है कि लगाए गए समय के दौरान हमने कितनी गंभीरता से प्रयास किया।” ‐ सिडने मैडवैड.
“It is not the hours we put in on the job, it is what we put into the hours that counts.” ‐ Sidney Madwed

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