ललितविक्रम : वृन्दावनलाल वर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – नाटक | Lalit Vikram : by Vrindawan Lal Verma Hindi PDF Book – Drama (Natak)

Book Nameललितविक्रम / Lalit Vikram
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 112
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

ललितविक्रम का संछिप्त विवरण : हमारा भविष्य जैसे कल्पना के परे दूर तक फैला हुआ है, हमारा अतीत भी उसी प्रकार स्मृति पार तक विस्तृत है। अतीत के जिस अंश तक प्रमाण की किरणे कह हँच सकती है। उसे हम इतिहास की संज़ा देते है जो जीवन के स्पन्दन से रहित इतिवबृत्त मात्र है। जो हमारे तक की सीमा के पार घटित हो चुका है बह प्राण की सीमा में आबदड होकर……

Lalit Vikram PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Hamara Bhavishy jaise kalpana ke pare door tak phaila huya hai, hamara ateet bhee usee prakar smrti par tak vistrt hai. Ateet ke jis ansh tak praman kee kirane pahunch sakati hai. Use ham itihas kee sangya dete hai jo jeevan ke spandan se rahit itivrtt matra hai. jo hamare tark kee seema ke par ghatit ho chuka hai vah puran kee seema mein aabaddh hokar…………
Short Description of Lalit Vikram PDF Book : Our future spreads far beyond imagination, our past too extended to the extent of memory. The extent to which the quantity of the reaches can reach. We give him the name of history which is merely a chronicle devoid of life. Which has happened beyond the bounds of our logic, bound by the boundary of the Purana………..
“ऐसा नहीं है कि कार्य कठिन हैं इसलिए हमें हिम्मत नहीं करनी चाहिए, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम हिम्मत नहीं करते हैं इसलिए कार्य कठिन हो जाते हैं।” ‐ सेनेका
“It is not because things are difficult that we do not dare; it is because we do not dare that things are difficult.” ‐ Seneca

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