रस विज्ञान | Ras Vigyan
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रस विज्ञान पुस्तक का कुछ अंश : जैसे ऊर्ण, रूई, मिट्टी में अज्ञान की आँखों से परिणाम होता हुआ सा दृष्टि गोचर होता है किन्तु ज्ञानियों की दृष्टि में भ्रम मूलक विचारों का प्रतिबिम्ब भी नहीं पड़ता। जैसे-किसी बीज में परिणाम होता सा लोग देखते हैं किन्तु उसके मूल तत्व में जैसी की तैसी यथात्मता बनी रहती है। धर्मी के आत्मस्वरूप में परिणाम नहीं अपितु उसके धर्म में है वह भी अपूर्ण बोध के कारण बुद्धि का विषय बनता है…………
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | रस विज्ञान | Ras Vigyan |
| Author | Shri Ramharshan Das ji |
| Category | Spiritual PDF Book in Hindi Social PDF Books In Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 24 |
| Quality | Good |
| Size | 3 MB |
| Download Status | Available |
“किसी निर्दोष को दंडित करने से बेहतर है एक दोषी व्यक्ति को बख़्श देने का जोख़िम उठाना।” ‐ वाल्तेयर (१६९४-१७७८)
“It is better to risk saving a guilty man than to condemn an innocent one.” ‐ Voltaire (1694-1778), French Writer and Philosopher
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