उत्तर की दीवारें / Uttar Ki Deewaren
पुस्तक का विवरण / Book Details | |
Book Name | उत्तर की दीवारें / Uttar Ki Deewaren |
Author | Kaka Kalelakar |
Category | Uncategorized, उपन्यास / Novel, कहानी / Story, Autobiography, Historical, Kahani |
Language | हिंदी / Hindi |
Pages | 94 |
Quality | Good |
Size | 4 MB |
Download Status | Available |
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पुस्तक का बिवरण : गॉधीजी ने आश्रम के लिए स्थान बहुत अच्छा पसंद किया | उत्तर की ओर साबरमती जेल की दीबारें दिखाओ देती है, तो दक्षिण की और दूधेश्वर का श्मशान है सामने ही शाहीबाग से लेकर एलिसब्रिज तक फैली हुऔ अहमदाबाद के मिलों की लम्बी लम्बी चिमनियां दीखाओ देती है | पीछे की ओर तो सिवाय उजाड़ भूमि के और कुछ है ही नहीं …….
Pustak Ka Vivaran : Gandhiji ne Ashram ke liye Sthan bahut Achchha Pasand kiya. Uttar ki or Sabarmati jel ki deevaren dikhai deti hai, to Dakshin ki aur Dudheshvar ka Shmashan hai Samne hi Shahibaag se Lekar Elisabrij tak Phaili huyi Ahamdabad ke Milon ki Lambi Lambi Chimaniyan dikhayi deti hai. Pechhe ki or to Sivay Ujad bhumi ke aur kuchh hai hi nahin………..
Description about eBook : Gandhiji liked the place for the ashram. The walls of the Sabarmati jail are displayed on the north side, the south and the cremation ground of Dikshveshwar, from the Shahibag to Ellisbridge, in front of them, the long chimneys of Ahmedabad mills are visible. There is nothing else except the back of the desolate land…………..
“अपना जीवन ऐसे जिये कि आपके बच्चे अपने बच्चों से कह सकें कि आप न केवल किसी प्रशंसनीय निमित्त के समर्थक थे – आप उसका पालन भी करते थे।” डेन जाद्रा
“Live you life so that your children can tell their children that you not only stood for something wonderful – you acted on it!” Dan Zadra
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