प्लेइंग इट माय वे – मेरी आत्मकथा : सचिन तेंदुलकर द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Playing It My Way – My Autobiography : by Sachin Tendulkar Hindi Audiobook
Playing It My Way – My Autobiography Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : मुझे लगता है कि कोई भी आत्मकथा लेखक की ज़िंदगी की हर बात बताने का दावा नहींः कर सकती। यह असंभव है। कई पहलू ऐसे होते हैं, जिनके बारे में किसी कारण नहीं लिखा जा सकता। कई घटनाएँ ऐसी होती हैं, जो निहायत निजी या शायद बहुत ज़्यादा संवेदनशील होती हैं। लेकिन मैं अपने करियर के इस वर्णन को यथासंभव पूरी कहानी बताने के इरादे से लिख रहा हूँ। ज़ाहिर है, मैंने जिन घटनाओं का वर्णन किया है, उनमें से कई क्रिकेट प्रेमियों को पहले से पता हैं, लेकिन मैंने कई ऐसी बातें भी बताई हैं, जो मैंने पहले कभी नहीं बताईं और इनमें से कुछ बातों से मुझे संकोच होता है। मुझे उम्मीद है कि पाठकों को यहाँ बहुत सी रोचक सामग्री मिलेगी। यह पुस्तक शुरू करने से पहले मुझे इस बारे में काफ़ी सोचना पड़ा कि क्या इसे लिखना सही रहेगा। यह कोई आसान निर्णय नहीं था। मैं सनसनीख़ेज़ बनने की ख़ातिर सनसनी फैलाने का आदी नहीं हूँ। मैं किसी को चिढ़ाने के लिए कुछ कहने का आदी भी नहीं हूँ। यह मेरे स्वभाव में ही नहीं है। लेकिन मैं जानता था कि अगर मैं अपनी कहानी लिखने के लिए तैयार हो जाता हूँ, तो मुझे पूरी तरह से ईमानदार होना होगा, क्योंकि मैंने खेल को हमेशा इसी तरह खेला है। तो यह लीजिए, मैं अपनी आख़िरी पारी के अंत में खड़ा हूँ, पवेलियन तक जाने वाली अंतिम यात्रा पूरी कर चुका हूँ और अपने करियर की कई घटनाएँ बताने के लिए तैयार हूँ, जिनमें समय गुज़ारना मेरी खुशक़िस्मती थी |
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| AudioBook Name | प्लेइंग इट माय वे - मेरी आत्मकथा / Playing It My Way - My Autobiography |
| Author | Sachin Tendulkar, Boria Majumdar |
| Category | Hindi Audiobooks Autobiography Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Duration | 23:42 Mins |
| Source | Youtube |
“यदि आपने हवाई किलों का निर्माण किया है तो आपका कार्य बेकार नहीं जाना चाहिए, हवाई किले हवा में ही बनाए जाते हैं। अब, उनके नीचे नींव रखने का कार्य करें।” ‐ हैनरी डेविड थोरेयू
“If you have built castles in the air, your work need not be lost; that is where they should be. Now put the foundations under them.” ‐ Henry David Thoreau
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