गोलियों की भाषा : पुन्नी सिंह | Goliyon Ki Bhasha : By Punni Singh Hindi Book
गोलियों की भाषा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : मैं पहलवान की बग़ीची में पहुँचा, तब हीरा चाचा ‘मशीन’ की सूई में धागा डालने का काम कर रहे थे।
वे दाहिने हाथ के अंगूठे से थूक लगाते। फिर अँगूठे और तर्जनी के बीच में धागे का छोर लेकर उसे बँटते। उस धागे को सूई की नोंक तक बड़ी सावधानी से ले जाते। सूई के नकुवे में उतनी ही सावधानी से धागा डालने की कोशिश करते। जब उन्हें लगता कि सूई में धागा पड़ गया है, तो एक क्षण के लिये उनका चेहरा चमक जाता, लेकिन दूसरे ही क्षण बायें हाथ से धागे का छोर पकड़कर खींचते, तो पता लगता कि वह सूई के नकुबे में गया ही नहीं था। तब उनके चेहरे की खीज देखते बनती, लेकिन फिर भी वे सूई में धागा डालने की कोशिश जारी रखते।
मैं हीरा चाचा की बाल में तखत पर बैठा था। हम दोनों के ठीक सामने नीम के पेड़ की छाया में गाँव के कुछ छोकरे बैठे थे। वे आपस में कानाफूसी कर रहे थे। हमारी तरफ़ छिपे हुए इशारे करके मुस्करा रहे थे। उनमें से एक छोकरे को मैं पहचानता था। वह मेरे पड़ोसी गोपी धोबी का अट्ठारह उन्नीस साल का बहुत सुंदर छोकरा था। वह गहरे रंग का छींटदार तहमद और वैसे ही भड़कीले रंग की टीशर्ट पहने था। वह मेरी ओर देखता, तो थोड़ा सहम जाता, लेकिन जब हीरा चाचा की निगाह से उसकी निगाह मिलती, तो वह बहुत ही कँटीला मुस्कराता ।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | गोलियों की भाषा | Goliyon Ki Bhasha |
| Author | पुन्नी सिंह / Punni Singh |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Entertainment Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 176 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“जीवन की त्रासदी इस बात में नहीं है कि आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचते हैं। त्रासदी तो इस बात की है कि आपके पास प्राप्त करने के लिए कोई लक्ष्य नहीं है।” ‐ बेंजामिन मेअस
“The tragedy of life doesn’t lie in not reaching your goal. The tragedy lies in having no goal to reach.” ‐ Benjamin Mays
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