लघु कथा संग्रह : जयमंत मिश्रा पुस्तक | Laghu Katha Sangrah : By Jaymant Mishra Hindi Book
लघु कथा संग्रह पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : लघु कथा संग्रह का दूसरा भाग अपने पाठकों के हाथों में सौंपते हुए हमें बड़ी प्रसन्नता हो रही है। जैसा कि इस पुस्तक के प्रथम भाग में हमने सूचित किया है साहित्य अकादेमी उक्त संग्रह की कथाओं को पाठकीय सुविधा की दृष्टि से दो भागों में प्रकाशित कर रही है। इसके पहले भाग में वे परम्परागत कथाएँ और आख्यान संकलित हैं, जो अल्पवय पाठकों के लिए अधिक रुचिकर और प्रेरणास्पद हो सकती हैं। ऐसी आदर्श और उपदेशपरक कथाओं के साथ हमने उन आधुनिक कहानियों को भी संकलित किया है, जो हमारे आधुनिक जीवन के विषम स्वरूप एवं स्वभाव को चित्रित करती हैं। उन कथाओं के साथ हमने संबंधित चित्र भी संयोजित किए हैं, ताकि उनकी रोचकता बनी रहे। लेकिन इस दूसरे भाग में यह प्रयास किया गया है कि वे कहानियाँ, जो किशोर पाठक के भावबोध को प्रेरित और मानस को उद्वेलित कर सकती हैं-उन्हें इस खण्ड में व्यवस्थित कर संकलित किया जाए। हम इस भाग में संकलित कथाओं के साथ चित्र देकर अनावश्यक पृष्ठ नहीं बढ़ाना चाहते थे, जिससे कि पाठकों को अधिकाधिक पाठ्य सामग्री पढ़ने को मिले और पुस्तक की कीमत भी अधिक न हो। इन कथाओं को प्रकाशित करते हुए उन अप्रिय प्रसंगों को संपादित कर दिया गया है, जो अनावश्यक प्रतीत होते थे और ऐसा करते हुए इस बात का समुचित ध्यान रखा गया है कि मुद्रित सामग्री की प्रस्तुति में कोई प्रमाद न हो।
आशा है, इस संयोजन से हमें दोनों आयु वर्ग के पाठकों के निकट पहुँचने का अवसर मिलेगा। कहना न होगा, इनमें से बहुत-सी कहानियाँ ऐसी हैं, जो कई-कई बार सुनी-सुनाई गई हैं, लेकिन अपने प्रभाव और संदेश के कारण वे कभी पुरानी नहीं पड़ सकतीं। पाठकों को यह देखकर
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | लघु कथा संग्रह | Laghu Katha Sangrah |
| Author | Jaymant Mishra |
| Category | Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 155 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“अपनों में दूसरों की रुचि जगाने का प्रयास कर आप जितने मित्र दस वर्षों में बना सकतें हैं, उससे कहीं अधिक मित्र आप दूसरों में अपनी रुचि दिखा कर एक माह में बना सकते हैं।” ‐ चार्ल्स ऐलन
“You can make more friends in a month by being interested in them than in ten years by trying to get them interested in you.” ‐ Charles Allen
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