चौराहा : रमेश चंद्र ‘प्रेम’ द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – उपन्यास | Chauraha : by Ramesh Chandra ‘Prem’ Hindi PDF Book – Novel (Upanyas)

चौराहा : रमेश चंद्र 'प्रेम' द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास | Chauraha : by Ramesh Chandra 'Prem' Hindi PDF Book - Novel (Upanyas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name चौराहा / Chauraha
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 188
Quality Good
Size 6 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : तब बिनीत होकर कल्पना ने कहा, “तुम तो तनिक सी ही बात पर रूठ जाती हो जीजी ! दो सप्ताह बाद आज ज्बर टूटा है, कितनी मलिन हो गई हो, तिस पर भी पानी भरने चली गई। आकर सारे वस्त्र भिगो डाले, यदि फिर ज्वर चढ़ आया तो व्यर्थ में ही क्या दुखी नहीं होगी।” निरुषमा से सहा नहीं आया…….

Pustak Ka Vivaran : Tab Vineet hokar kalpana ne kaha, Tum to Tanik see hee bat par rooth jati ho Jeejee ! Do saptah bad aaj jvar toota hai, kitanee malin ho gayi ho, Tis par bhee panee bharane chalee gayi. Aakar sare vastra bhigo dale, Yadi phir jvar chadh aaya to vyarth mein hee kya dukhee nahin hogi. Nirupama se saha nahin aaya…………

Description about eBook : Then, in vainith, Kalpana said, “You are angry on the same thing, Jiji! Two weeks later, today the fever is broken, how dirty it is, the third went to fill the water. Come and put all the clothes soaked, if the fever climbs, then what will not be unhappy in vain. “Nirupama did not come out………..

“जब हम कठिन कार्यों को चुनौती के रुप में स्वीकार करते हैं और उन्हें खुशी और उत्साह से निष्पादित करते हैं, तो चमत्कार हो सकते हैं।” ‐ अल्बर्ट गिल्बर्ट
“When we accept tough jobs as a challenge and wade into them with joy and enthusiasm, miracles can happen.” ‐ Arland Gilbert

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