Mahuacharita : By Kashinath Singh Hindi Book | महुआचरित : काशीनाथ सिंह द्वारा हिंदी पुस्तक
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महुआचरित पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : मैं अकेली बेहद अकेली हो गई थी। मैं जब भी बाथरूम में नहाने जाती, कपड़े अलग करती और अपने बदन को बड़े गौर से देखती। हो सकता है गलत हो यह लेकिन जाने क्यों मुझे लगता कि यह शरीर गमले में पड़े गुलाब के उस पौधे की तरह हो गया है। जिसे अगर तुरन्त पानी न मिला तो सूखते देर न लगेगी! इसे पानी चाहिए, कोई पानी दो । लेकिन कौन देगा पानी ? अस्सी साल के पापा स्वतंत्रता सेनानी विचारों से सेकुलर । देश की दुर्दशा से दुखी! जिसे विकास कहते हैं,
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | महुआचरित | Mahuacharita |
| Author | Kashinath Singh |
| Category | Fiction Book in Hindi PDF Novel in Hindi PDF Book Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 108 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“यदि कोई व्यक्ति धन के प्रति अपनी सोच या रवैये को ठीक कर लेता है, इससे उसके जीवन में लगभग हर दूसरे पहलू को ठीक करने में सहायता मिलती है।” ‐ बिल्ली ग्राहम
“If a person gets his attitude toward money straight, it will help straighten out almost every other area in his life.” ‐ Billy Graham
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