शोरगुल : कमल उपाध्याय द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कविता | Shorgul : by Kamal Upadhyay Hindi PDF Book – Poem (Kavita)

Book Nameशोरगुल / Shorgul
Author
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Language
Pages 125
Quality Good
Size 731 KB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : जो बाज़ार चहकता था हर शाम आज कुछ सुनसान सा लग रहा है। गोलगप्पे की दुकान का ठेला जलेबी वाले के चुल्हे पर से बर्तन चाय पे चुस्कियाँ लेते लोग कोई भी आज नजर नहीं आ रहा। नालीयों में लाल रंग बह रहा है पता चला रंग नहीं पता चला रंग नहीं हिन्दू – मुसलमान का खून है। कल धर्म के नाम पर फसाद हुआ सुनता हूँ………..

Pustak Ka Vivaran : Jo Bajar baje har din kuchh shant sa lage hon. Golgappe ki dukan ka thela jalebi ch kechulhe par se chois pe chuskits bhi aisa hi hoga. Naliya mein Lal rang bah raha hai pasandeeda rang ka pata chalanevala – Musalman ka khoon hai. Kal dharm ke nam par………

Description about eBook : Every day at the market which seems a bit quiet. Choskits on choice from the jalebi of the golgappa shop on the stove will also be the same. The red color is flowing in the drain. The favorite color to be detected is the blood of a Muslim. Tomorrow in the name of religion…..

“आप हमेशा परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप स्वयं को नियंत्रित कर सकते हैं।” एंथनी रोब्बिन्स
“You can’t always control the wind, but you can control your sails.” Anthony Robbins

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