मेरा बचपन मेरे कंधो पर : श्यौराज सिंह | Mera Bachapan Mere Kandhon Par : By Shyauraj Singh Hindi Book

मेरा बचपन मेरे कंधो पर : श्योराज सिंह | मेरा बचपन मेरे कंधो पर : श्योराज सिंह | Mera Bachapan Mere Kandhon Par : By Dr. Sheoraj Singh Hindi Book
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मेरा बचपन मेरे कंधो पर पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : डॉ. श्योराज सिंह जी, आपकी आत्मकथा का अंश ‘यहाँ एक मोची रहता था’ मैंने पढ़ लिया है। दर्द ही दर्द है, कष्ट ही कष्ट है। मुझे लगा है, आपके साथ गालिब वाली बात घट गई है। उस महाकवि की गजल का एक शे’र है- रंज से खूंगर हुआ इंसा तो मिट जाता है रंज मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसां हो गई।
यह शेर आपकी आत्मकथा पर पूरी तरह फबता है। मेरे खयाल से, बचपन की सहजात शक्ति आप आज बड़े स्तर पर सुरक्षित और सैंजो कर रखे हुए हो… वर्णन में आप अपनी शैली में रहे हो। आपकी शैली दूसरे लेखकों से अलग पहचान की है। यह शान्त और ज्यादा प्रभावकारी है…..

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मेरा बचपन मेरे कंधो पर | Mera Bachapan Mere Kandhon Par
Author
CategoryBiography Book in Hindi Fiction Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi
Language
Pages 432
Quality Good
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“केवल प्रतिभाशाली होने से ही काम नहीं चलता। ईश्वर प्रतिभा देता है तो प्रतिभा को विलक्षणता में परिणत कर देता है काम।” ‐ अन्ना पाव्लोवा (१८८१-१९३१), रूसी नर्तकी
“No one can arrive from being talented alone. God gives talent; work transforms talent into genius.” ‐ Anna Pavlova.(1881-1931), Russian ballerina

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