केसरिया पगड़ी : यादवेन्द्र चन्द्र ‘शर्मा’ द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – उपन्यास | Kesariya Pagree : by Yadvendra Sharma ‘Chandra’ Hindi PDF Book – Novel (Upanyas)

केसरिया पगड़ी : यादवेन्द्र चन्द्र 'शर्मा' द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - उपन्यास | Kesariya Pagree : by Yadvendra Sharma 'Chandra' Hindi PDF Book - Novel (Upanyas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name केसरिया पगड़ी / Kesariya Pagree
Author
Category, , ,
Language
Pages 119
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : उन्होंने तुरन्त दुर्गादास के पिता आसकरण जी तलब किया। उनके हलके लाल रंग का अगरखा और घुटने तक की धोती बंधी हुई थी। सिर पर लाल रंग का साफा बचा था। बड़ी-बड़ी मूछें और कानों के नीचे तक की कटी जुल्फें। पात्रों में कशीदकारी उक्त जूती। “दुर्गादास” महाराज ने सिंहासन पर बैठे……..

Pustak Ka Vivaran : Unhonne Turant Durgadas ke Pita Aasakaran jee Talab kiya. Unake halake lal Rang ka Agarakha aur ghutane tak ki dhotee bandhi huyi thee. Sir par Lal Rang ka sapha badha tha. Badi-badi Moochhen aur kanon ke Neeche tak ki kati julphen. Patron mein Kashidakari ukt jooti. Durgadas Maharaj ne Sinhasan par baithe-baithe hi kaha………

Description about eBook : He immediately summoned Durgadas’s father Asakaran Ji. His light red colored agarkha and dhoti to the knee were tied. There was a red colored safa on the head. Big mustache and cut hairs under the ears. The embroidered stitch in the characters. “Durgadas” Maharaj said while sitting on the throne ………

“यदि आपने हवाई किलों का निर्माण किया है तो आपका कार्य बेकार नहीं जाना चाहिए, हवाई किले हवा में ही बनाए जाते हैं। अब, उनके नीचे नींव रखने का कार्य करें।” ‐ हैनरी डेविड थोरेयू
“If you have built castles in the air, your work need not be lost; that is where they should be. Now put the foundations under them.” ‐ Henry David Thoreau

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